एक थे कुशाल कोंवर बीती 2 अक्टूबर को असम की भाजपा सरकार ने शहीद कुशाल कोंवर के नाम पर वृद्धावस्था पेंशन योजना शुरू की थी,कौन थे कुशाल कोंवर? कुशाल कोंवर असम के एक युवा क्रांतिकारी थे जो गाँधी जी से प्रेरित हो कर काँग्रेस में शामिल हो कर आज़ादी के आंदोलन में कूद में कूद पड़े थे। 8 अगस्त 1942 को ऐतिहासिक "अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन" का ऐलान हुआ।पूरे देश के साथ ही(संघियों और मुस्लिम लीग को छोड़ कर) असम की जनता ने भी इसमें खुल कर भाग लिया था।कुशाल कोंवर उस समय #सरूपथर काँग्रेस कमेटी के अध्यक्ष थे 10 अक्टूबर 1942 को, सुबह के घने कोहरे में छिपे हुए, कुछ लोगों ने गोलाघाट जिले के सरूपथार के पास रेलवे लाइन के कुछ स्लीपरों को हटा दिया। एक मिलिट्री ट्रेन पटरी से उतर गई और कई ब्रिटिश और अमेरिकी सैनिक मारे गए
एक थे कुशाल कोंवर
बीती 2 अक्टूबर को असम की भाजपा सरकार ने शहीद कुशाल कोंवर के नाम पर वृद्धावस्था पेंशन योजना शुरू की थी,कौन थे कुशाल कोंवर?
कुशाल कोंवर असम के एक युवा क्रांतिकारी थे जो गाँधी जी से प्रेरित हो कर काँग्रेस में शामिल हो कर आज़ादी के आंदोलन में कूद में कूद पड़े थे।
8 अगस्त 1942 को ऐतिहासिक "अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन" का ऐलान हुआ।पूरे देश के साथ ही(संघियों और मुस्लिम लीग को छोड़ कर) असम की जनता ने भी इसमें खुल कर भाग लिया था।कुशाल कोंवर उस समय #सरूपथर काँग्रेस कमेटी के अध्यक्ष थे
10 अक्टूबर 1942 को, सुबह के घने कोहरे में छिपे हुए, कुछ लोगों ने गोलाघाट जिले के सरूपथार के पास रेलवे लाइन के कुछ स्लीपरों को हटा दिया। एक मिलिट्री ट्रेन पटरी से उतर गई और कई ब्रिटिश और अमेरिकी सैनिक मारे गए
कुशाल कोंवर पर ट्रेन तोड़फोड़ के मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप लगा, और ब्रिटिश पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
गोलाघाट से लाया गया था और 5 नवंबर 1942 को जोरहाट जेल में बंद कर दिया गया था।
अदालत में, कुशाल कोंवर को दोषी घोषित किया गया था, हालांकि उनके खिलाफ एक भी सबूत नहीं था। कुशाल को फांसी की सजा सुनाई गई थी। उन्होंने गरिमा के साथ फैसले को स्वीकार किया। जब उनकी पत्नी, प्रभाती ने जोरहाट जेल में उनसे मुलाकात की, तो उन्होंने उन्हें बताया कि उन्हें गर्व है कि देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने के लिए भगवान ने उन्हें हजारों कैदियों में से एक चुना है।
15 जून 1943 को कोंवर को जोरहट जेल में फ़ांसी दे दी गई,और भारत माँ का यह सपूत सगर्व अपने देश के लिये शहीद हो गया
आज़ादी की लड़ाई में एक नाखून तक ना कटाने वाली विचारधारा के लोग आज बड़ी बेशर्मी से पूछते हैं कि-काँग्रेस के किस नेता को फाँसी हुई?
लेकिन उसी विचारधारा के नेताओं को देश के किसी भी राज्य में आज़ादी की लड़ाई में शहीद हुआ कोई #संघी नहीं मिलेगा जिस के नाम पर कोई योजना चला सकें।
उन्हें भी काँग्रेसियों के ही नाम का सहारा है
Comments
Post a Comment