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जंगल में झोंपड़ी

ये सारी दुनिया मरासिम(संबन्धों)पर टिकी हुई है, अदावत से ले कर मोहब्बत तक। बस यही मरासिम हमारी ज़िंदगी का सबसे स्याह/सफेद पन्ना बन जाते हैं। लगाव,भावनाएँ रिश्ते ये सब वो चीजें हैं जो इंसान के दायरे तय करती हैं,इन चीजें का पक्ष अगर स्याह हो तो इंसान ताउम्र अपने जेहन से ही लड़ता रहेगा,अपनी प्रतिभा और व्यक्तित्व को बिना मौका मिले ही खत्म कर लेगा लेकिन अगर यही पक्ष उजला हो तो इंसान असीमित क्षमताओं का प्रदर्शन करता है बस यहीं से हम लोगों में कुंठा का जन्म होता है और ये कुंठा हमारे व्यक्तित्व से ले कर मानसिकता तक में झलकने लगती है और फिर एक स्तर पर पहुंचने के बाद लगने लगता है कि इस सारी दुनिया से कहीं दूर चले जाएं लेकिन ये संभव नहीं है,क्योंकि इंसानी फितरत में सब से ज्यादा वजन रिश्तों का होता है,जिनकी वजह से हम बहुत कुछ सह जाते हैं,बहुत कुछ झेल जाते हैं यकीन मानिये जिस इंसान के साथ कोई रिश्ता जुड़ा हुआ नहीं हो वो इंसान दुनिया के सबसे संतुष्ट इंसानों में हो सकता है(लेकिन ये संभव ही नहीं है,क्योंकि पैदा होते ही हमारे रिश्ते बन जाते हैं) कभी मन करता है किसी जंगल में निकल जाएं,वहां झोंपड़ी बनाएं,आराम...

एक थे कुशाल कोंवर बीती 2 अक्टूबर को असम की भाजपा सरकार ने शहीद कुशाल कोंवर के नाम पर वृद्धावस्था पेंशन योजना शुरू की थी,कौन थे कुशाल कोंवर? कुशाल कोंवर असम के एक युवा क्रांतिकारी थे जो गाँधी जी से प्रेरित हो कर काँग्रेस में शामिल हो कर आज़ादी के आंदोलन में कूद में कूद पड़े थे। 8 अगस्त 1942 को ऐतिहासिक "अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन" का ऐलान हुआ।पूरे देश के साथ ही(संघियों और मुस्लिम लीग को छोड़ कर) असम की जनता ने भी इसमें खुल कर भाग लिया था।कुशाल कोंवर उस समय #सरूपथर काँग्रेस कमेटी के अध्यक्ष थे 10 अक्टूबर 1942 को, सुबह के घने कोहरे में छिपे हुए, कुछ लोगों ने गोलाघाट जिले के सरूपथार के पास रेलवे लाइन के कुछ स्लीपरों को हटा दिया। एक मिलिट्री ट्रेन पटरी से उतर गई और कई ब्रिटिश और अमेरिकी सैनिक मारे गए

एक थे कुशाल कोंवर बीती 2 अक्टूबर को असम की भाजपा सरकार ने शहीद कुशाल कोंवर के नाम पर वृद्धावस्था पेंशन योजना शुरू की थी,कौन थे कुशाल कोंवर? कुशाल कोंवर असम के एक युवा क्रांति...